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किडनी स्टोन कितने प्रकार के होते हैं

किडनी स्टोन कितने प्रकार के होते हैं?

किडनी स्टोन (गुर्दे की पथरी) मुख्य रूप से चार प्रकार के होते हैं: कैल्शियम स्टोन (कैल्शियम ऑक्सालेट और कैल्शियम फॉस्फेट), यूरिक एसिड स्टोन, स्ट्रूवाइट स्टोन और सिस्टीन स्टोन।

इस लेख में जानिए किडनी स्टोन कितने प्रकार के होते हैं, उनके बनने के कारण, किन लोगों में कौन-सी पथरी अधिक होती है और उपचार के दौरान स्टोन के प्रकार की पहचान क्यों महत्वपूर्ण होती है

किडनी स्टोन क्या होता है?

किडनी स्टोन (Kidney Stone) खनिज और लवण से बना एक कठोर जमाव (Hard Deposit) होता है, जो किडनी के अंदर बनता है। सामान्य रूप से ये खनिज मूत्र के साथ शरीर से बाहर निकल जाते हैं, लेकिन जब उनकी मात्रा अधिक हो जाती है या शरीर में पानी की कमी होती है, तो वे छोटे-छोटे क्रिस्टल बनाने लगते हैं। समय के साथ ये क्रिस्टल आपस में मिलकर पथरी का रूप ले लेते हैं।

किडनी स्टोन का आकार रेत के कण जितना छोटा भी हो सकता है और कई बार यह इतना बड़ा हो जाता है कि मूत्र के प्रवाह में रुकावट पैदा कर देता है। पथरी का प्रकार उसके बनने वाले खनिजों पर निर्भर करता है, इसलिए सभी किडनी स्टोन एक जैसे नहीं होते।

किडनी स्टोन कितने प्रकार के होते हैं?

किडनी स्टोन मुख्य रूप से चार प्रकार (4 Types) के होते हैं। प्रत्येक प्रकार की पथरी अलग-अलग खनिजों से बनती है और इसके बनने के कारण भी अलग हो सकते हैं। इसलिए सही उपचार के लिए यह जानना जरूरी होता है कि मरीज को किस प्रकार का किडनी स्टोन है।

1. कैल्शियम स्टोन (Calcium Stone)

कैल्शियम स्टोन सबसे सामान्य प्रकार का किडनी स्टोन है। लगभग 70–80% मामलों में इसी प्रकार की पथरी पाई जाती है। यह मुख्य रूप से कैल्शियम ऑक्सालेट (Calcium Oxalate) या कैल्शियम फॉस्फेट (Calcium Phosphate) से बनती है।

कैल्शियम स्टोन बनने के सामान्य कारण:

  • पर्याप्त पानी न पीना

  • अधिक नमक का सेवन

  • ऑक्सालेट युक्त खाद्य पदार्थों का अधिक सेवन

  • कुछ मेटाबॉलिक विकार

2. यूरिक एसिड स्टोन (Uric Acid Stone)

यूरिक एसिड स्टोन तब बनता है जब मूत्र में यूरिक एसिड की मात्रा बढ़ जाती है या मूत्र अधिक अम्लीय (Acidic) हो जाता है। यह पथरी उन लोगों में अधिक देखी जाती है जो अधिक मात्रा में पशु प्रोटीन (Animal Protein) का सेवन करते हैं या गाउट (Gout) जैसी समस्या से पीड़ित होते हैं।

यूरिक एसिड स्टोन बनने के सामान्य कारण:

  • अधिक रेड मीट या पशु प्रोटीन का सेवन

  • गाउट (Gout)

  • पर्याप्त पानी न पीना

  • अत्यधिक अम्लीय मूत्र (Acidic Urine)

3. स्ट्रुवाइट स्टोन (Struvite Stone)

स्ट्रुवाइट स्टोन आमतौर पर बार-बार होने वाले यूरिनरी ट्रैक्ट इंफेक्शन (UTI) के कारण बनता है। यह अपेक्षाकृत तेजी से बढ़ सकता है और कई बार आकार में काफी बड़ा हो जाता है।

स्ट्रुवाइट स्टोन बनने के सामान्य कारण:

  • बार-बार यूरिन इंफेक्शन (UTI)

  • मूत्र मार्ग में संक्रमण पैदा करने वाले बैक्टीरिया

  • लंबे समय तक संक्रमण का इलाज न होना

4. सिस्टीन स्टोन (Cystine Stone)

सिस्टीन स्टोन एक दुर्लभ (Rare) प्रकार की पथरी है। यह आमतौर पर सिस्टिन्यूरिया (Cystinuria) नामक आनुवंशिक (Genetic) बीमारी के कारण बनती है, जिसमें शरीर मूत्र के माध्यम से अधिक मात्रा में सिस्टीन नामक अमीनो एसिड बाहर निकालता है।

सिस्टीन स्टोन बनने के सामान्य कारण:

  • आनुवंशिक (Genetic) कारण

  • सिस्टिन्यूरिया (Cystinuria)

  • परिवार में इस बीमारी का इतिहास

कौन-सा किडनी स्टोन सबसे अधिक होता है?

कैल्शियम स्टोन (Calcium Stone) किडनी स्टोन का सबसे सामान्य प्रकार है। विभिन्न अध्ययनों के अनुसार, लगभग 70–80% किडनी स्टोन कैल्शियम ऑक्सालेट (Calcium Oxalate) या कैल्शियम फॉस्फेट (Calcium Phosphate) से बने होते हैं।

हालांकि शरीर के लिए कैल्शियम एक आवश्यक पोषक तत्व है, लेकिन जब मूत्र में कैल्शियम, ऑक्सालेट या अन्य खनिजों की मात्रा बढ़ जाती है और पर्याप्त पानी नहीं पिया जाता, तो इनके क्रिस्टल बनने लगते हैं। समय के साथ यही क्रिस्टल आपस में मिलकर पथरी का रूप ले सकते हैं।

इसका मतलब यह नहीं है कि कैल्शियम युक्त भोजन पूरी तरह बंद कर देना चाहिए। अधिकांश लोगों के लिए संतुलित मात्रा में प्राकृतिक कैल्शियम का सेवन सुरक्षित होता है। बिना डॉक्टर की सलाह के कैल्शियम युक्त खाद्य पदार्थों या सप्लीमेंट्स को बंद करना उचित नहीं है।

किडनी स्टोन

किन लोगों में अधिक देखा जाता है?

कैल्शियम स्टोन

अधिकांश वयस्कों में, विशेषकर कम पानी पीने वालों में

यूरिक एसिड स्टोन

गाउट, मोटापा या अधिक रेड मीट खाने वाले लोगों में

स्ट्रुवाइट स्टोन

बार-बार UTI होने वाले मरीजों में

सिस्टीन स्टोन

जिन लोगों में सिस्टिन्यूरिया जैसी आनुवंशिक समस्या होती है

किडनी स्टोन का प्रकार कैसे पता चलता है?

किडनी स्टोन का सही उपचार करने के लिए यह जानना जरूरी होता है कि पथरी किस प्रकार की है। इसके लिए डॉक्टर मरीज के लक्षण, मेडिकल हिस्ट्री और कुछ जांचों की मदद लेते हैं।

किडनी स्टोन के प्रकार की पहचान के लिए निम्न जांचें की जा सकती हैं—

1. यूरिन टेस्ट (Urine Test)

यूरिन टेस्ट से मूत्र में कैल्शियम, ऑक्सालेट, यूरिक एसिड, संक्रमण या अन्य असामान्य तत्वों की जांच की जाती है, जो पथरी बनने के कारणों का पता लगाने में मदद करते हैं।

2. ब्लड टेस्ट (Blood Test)

ब्लड टेस्ट के माध्यम से कैल्शियम, यूरिक एसिड और किडनी की कार्यक्षमता (Kidney Function) की जांच की जा सकती है।

3. इमेजिंग जांच (Ultrasound या CT Scan)

अल्ट्रासाउंड और सीटी स्कैन (CT Scan) से पथरी का आकार, स्थान और संख्या का पता चलता है। इससे उपचार की योजना बनाने में सहायता मिलती है।

4. स्टोन एनालिसिस (Stone Analysis)

यदि पथरी मूत्र के साथ बाहर निकल जाती है या उपचार के दौरान निकाली जाती है, तो उसकी प्रयोगशाला में जांच (Stone Analysis) की जा सकती है। इससे यह पता चलता है कि पथरी किस खनिज से बनी है और भविष्य में दोबारा पथरी बनने से बचाव के लिए उचित सलाह दी जा सकती है।

क्या सभी प्रकार के किडनी स्टोन का इलाज एक जैसा होता है?

नहीं। सभी प्रकार के किडनी स्टोन का इलाज एक जैसा नहीं होता। उपचार इस बात पर निर्भर करता है कि पथरी किस प्रकार की है, उसका आकार कितना है, वह किडनी या मूत्र मार्ग में कहां स्थित है और क्या उससे कोई लक्षण या जटिलता हो रही है।

कुछ मामलों में छोटी पथरी पर्याप्त पानी पीने, दवाओं और जीवनशैली में बदलाव से अपने आप निकल सकती है। वहीं बड़ी पथरी या मूत्र मार्ग में रुकावट पैदा करने वाली पथरी के लिए विशेष उपचार की आवश्यकता हो सकती है।

उपचार का चुनाव करते समय डॉक्टर निम्न बातों का ध्यान रखते हैं—

  • पथरी का प्रकार (Stone Type)

  • पथरी का आकार (Stone Size)

  • पथरी का स्थान (Stone Location)

  • मरीज की उम्र और सामान्य स्वास्थ्य

  • दर्द, संक्रमण या मूत्र रुकने जैसी समस्याओं की मौजूदगी

किडनी स्टोन के उपचार के विकल्प

स्थिति के अनुसार डॉक्टर निम्न उपचारों में से किसी एक की सलाह दे सकते हैं—

  • दवाओं द्वारा उपचार (Medical Management): छोटी पथरी और हल्के लक्षणों वाले मरीजों में।

  • RIRS (Retrograde Intrarenal Surgery): किडनी के अंदर मौजूद कुछ प्रकार की पथरी को लेजर की मदद से हटाने की एक मिनिमली इनवेसिव प्रक्रिया।

  • URS / Laser URSL: यूरेटर (Ureter) में फंसी पथरी को लेजर तकनीक से निकालने की प्रक्रिया।

  • Mini PCNL / PCNL: बड़ी या जटिल किडनी स्टोन के उपचार के लिए उपयोग की जाने वाली मिनिमली इनवेसिव सर्जिकल तकनीक।

सही उपचार क्यों जरूरी है?

हर मरीज के लिए एक ही उपचार उपयुक्त नहीं होता। गलत या देर से इलाज कराने पर पथरी का आकार बढ़ सकता है, संक्रमण हो सकता है या किडनी की कार्यक्षमता प्रभावित हो सकती है। इसलिए सही जांच के बाद ही उपचार का निर्णय लेना चाहिए।

किडनी स्टोन से बचाव कैसे करें?

हालांकि हर प्रकार की किडनी स्टोन को पूरी तरह रोका नहीं जा सकता, लेकिन सही खान-पान और स्वस्थ जीवनशैली अपनाकर इसके जोखिम को काफी हद तक कम किया जा सकता है। यदि आपको पहले कभी किडनी स्टोन हो चुका है, तो बचाव के उपाय अपनाना और भी महत्वपूर्ण हो जाता है।

1. पर्याप्त मात्रा में पानी पिएं

दिनभर पर्याप्त पानी पीने से मूत्र पतला (Dilute) रहता है, जिससे खनिज और लवण जमा होने की संभावना कम हो जाती है। यह किडनी स्टोन से बचाव का सबसे प्रभावी तरीका माना जाता है।

2. संतुलित आहार अपनाएं

अपने आहार में ताजे फल, हरी सब्जियां, साबुत अनाज और फाइबर युक्त खाद्य पदार्थ शामिल करें। संतुलित आहार किडनी के स्वास्थ्य को बनाए रखने में मदद करता है।

3. नमक का सेवन सीमित रखें

अधिक नमक खाने से मूत्र में कैल्शियम की मात्रा बढ़ सकती है, जिससे कुछ प्रकार की किडनी स्टोन बनने का खतरा बढ़ जाता है। इसलिए प्रोसेस्ड और अत्यधिक नमकीन खाद्य पदार्थों का सेवन सीमित करें।

4. स्वस्थ वजन बनाए रखें

मोटापा किडनी स्टोन का एक महत्वपूर्ण जोखिम कारक है। नियमित व्यायाम और संतुलित भोजन से स्वस्थ वजन बनाए रखना फायदेमंद हो सकता है।

5. बिना सलाह के सप्लीमेंट्स लेने से बचें

कैल्शियम, विटामिन C या अन्य सप्लीमेंट्स का अधिक मात्रा में सेवन कुछ लोगों में किडनी स्टोन बनने का जोखिम बढ़ा सकता है। किसी भी सप्लीमेंट का सेवन डॉक्टर की सलाह के अनुसार ही करें।

6. पहले किडनी स्टोन हो चुका है तो नियमित जांच कराएं

यदि आपको पहले कभी किडनी स्टोन हो चुका है, तो डॉक्टर की सलाह के अनुसार समय-समय पर जांच कराना और आवश्यक सावधानियां अपनाना दोबारा पथरी बनने के जोखिम को कम करने में मदद कर सकता है।

निष्कर्ष

किडनी स्टोन के कई प्रकार होते हैं, जैसे कैल्शियम स्टोन, यूरिक एसिड स्टोन, स्ट्रुवाइट स्टोन और सिस्टीन स्टोन। प्रत्येक प्रकार की पथरी बनने का कारण, जोखिम कारक और उपचार अलग-अलग हो सकते हैं। इसलिए केवल पथरी का पता चलना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि उसके प्रकार की पहचान करना भी सही उपचार और भविष्य में दोबारा पथरी बनने से बचाव के लिए महत्वपूर्ण होता है।

यदि आपको बार-बार किडनी स्टोन बन रहा है, तेज कमर दर्द, पेशाब में खून, बार-बार यूरिन इंफेक्शन या अन्य संबंधित लक्षण दिखाई दे रहे हैं, तो समस्या को नजरअंदाज न करें। ग्रेटर नोएडा के अनुभवी यूरोलॉजिस्ट, डॉ. अनुज अरोड़ा से परामर्श लेकर समय पर सही जांच और उपचार कराना बेहतर किडनी स्वास्थ्य बनाए रखने और जटिलताओं से बचने का महत्वपूर्ण कदम हो सकता है।

किडनी स्टोन से जुड़े अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

1. सबसे ज्यादा कौन-सा किडनी स्टोन पाया जाता है?

कैल्शियम स्टोन (Calcium Stone) सबसे सामान्य प्रकार का किडनी स्टोन है। अधिकांश मामलों में यही प्रकार की पथरी पाई जाती है।

2. क्या एक व्यक्ति को अलग-अलग प्रकार के किडनी स्टोन हो सकते हैं?

हाँ। अलग-अलग समय पर या कुछ मामलों में एक ही व्यक्ति को अलग प्रकार की किडनी स्टोन हो सकती है। यह उसके स्वास्थ्य, खान-पान और अन्य जोखिम कारकों पर निर्भर करता है।

3. क्या किडनी स्टोन का प्रकार जांच से पता चल सकता है?

हाँ। यूरिन टेस्ट, ब्लड टेस्ट, CT Scan, अल्ट्रासाउंड और स्टोन एनालिसिस जैसी जांचों की मदद से पथरी के प्रकार का पता लगाया जा सकता है।

4. कौन-सा किडनी स्टोन दोबारा बनने की संभावना अधिक रखता है?

यदि जीवनशैली में सुधार न किया जाए या मूल कारण का उपचार न हो, तो कैल्शियम स्टोन और यूरिक एसिड स्टोन दोबारा बनने की संभावना अधिक हो सकती है।

5. क्या खान-पान से किडनी स्टोन का प्रकार प्रभावित हो सकता है?

हाँ। अधिक नमक, पशु प्रोटीन या कुछ विशेष खाद्य पदार्थों का अत्यधिक सेवन कुछ प्रकार की किडनी स्टोन बनने के जोखिम को बढ़ा सकता है।

6. क्या सभी प्रकार के किडनी स्टोन में एक जैसे लक्षण होते हैं?

अधिकांश किडनी स्टोन के लक्षण समान हो सकते हैं, जैसे कमर में दर्द, पेशाब में खून या जलन। हालांकि लक्षण पथरी के आकार और स्थान के अनुसार अलग-अलग हो सकते हैं।

7. कौन-सा किडनी स्टोन सबसे खतरनाक माना जाता है?

यदि कोई भी किडनी स्टोन मूत्र के प्रवाह में रुकावट पैदा करे, संक्रमण का कारण बने या किडनी को नुकसान पहुंचाए, तो वह गंभीर हो सकता है। इसलिए समय पर जांच और उपचार जरूरी है।

8. क्या किडनी स्टोन के प्रकार के अनुसार इलाज बदलता है?

हाँ। उपचार पथरी के प्रकार, आकार, स्थान और मरीज की स्थिति के अनुसार तय किया जाता है। इसलिए सही जांच के बाद ही उपचार की योजना बनाई जाती है।

9. क्या बच्चों में भी अलग-अलग प्रकार के किडनी स्टोन हो सकते हैं?

हाँ। हालांकि बच्चों में किडनी स्टोन कम देखने को मिलते हैं, लेकिन उनमें भी अलग-अलग प्रकार की पथरी हो सकती है।

10. क्या किडनी स्टोन का प्रकार दोबारा बनने से रोका जा सकता है?

सही खान-पान, पर्याप्त पानी पीने, नियमित जांच और डॉक्टर की सलाह का पालन करके कई मामलों में दोबारा किडनी स्टोन बनने के जोखिम को कम किया जा सकता है।

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